हम क्यूँ सोचते हैं
कभी life में ये सोचकर, कि "लोग क्या कहेंगे" खुद को अपनी मर्ज़ी का काम करने से रोका है? जैसे कोई अलग career चुनना जो doctor, engineer या mba ना हो, या फिर दुनिया की सारी जंजीरें तोड़के प्यार करना, या फिर वो कपड़े पहनना जिनकी length दुनिया ने नहीं बल्कि तुमने decide की है, या फिर अकेले जाकर hall में picture देखना... अमा छोड़ो यार ये should I do this, or should I not की confusion... ये बेकार की बातें सोचकर सोचकर ज़िन्दगी ऐसे ही निकल जायेगी एक दिन!!..चलो आज दुनिया के सारे rules तोड़के अपने मन का करें और जो ख्वाब कभी बन्द कमरे में देखे थे उन्हें बाहर निकलके पूरा करें...चलो आज अपनी ज़िन्दगी अपने शर्तों पे जीयें.. क्यूँकि एक ही तो ज़िन्दगी मिलती है दोस्तों, चलो उसे जीकर ही मरें!! कभी सोचते हैं, कि हम इतना क्यूँ सोचते हैं, अपनी हसरतों का गला क्यूँ घोंटते हैं... "लोग क्या कहेंगे", इस बनावटी दलील की चट्टान से, अपनी हस्ती को क्यूँ झोंकते हैं... कभी सोचते हैं, कि हम इतना क्यूँ सोचते हैं... क्यूँ ना कुछ ऐसा कर जाएं, जो सबसे अलग हो, जिससे दुनिया को नहीं, बल...